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Monday, 15 August 2016

तेरे लिए - Tere Liye (Veer Zaara, Lata Mangeshkar, Roop Kumar Rathod)

01:08
Movie/Album: वीर ज़ारा (2004)
Music By: मदन मोहन
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: लता मंगेशकर, रूप कुमार राठोड़

तेरे लिए, हम हैं जिये, होठों को सीये
तेरे लिए, हम हैं जिये, हर आँसू पिये
दिल में मगर, जलते रहे, चाहत के दीये
तेरे लिए, तेरे लिए

ज़िंदगी, ले के आई है
बीते दिनों की किताब
घेरे हैं, अब हमें
यादें बे-हिसाब
बिन पूछे, मिले मुझे
कितने सारे जवाब
चाहा था क्या, पाया है क्या
हमने देखिए
दिल में मगर...

क्या कहूँ, दुनिया ने किया
मुझसे कैसा बैर
हुकुम था, मैं जियूं
लेकिन तेरे बगैर
नादां हैं वो, कहते हैं जो
मेरे लिए तुम हो गैर
कितने सितम, हम पे सनम
लोगों ने किए
दिल में मगर...

Thursday, 9 June 2016

संदेसे आते हैं - Sandese Aate Hain (Sonu Nigam, Roop Kumar Rathod, Border)

04:43
Movie/Album: बॉर्डर (1998)
Music By: अनु मलिक
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: सोनू निगम, रूप कुमार राठोड़

संदेसे आते हैं, हमें तड़पाते हैं
जो चिट्ठी आती है, वो पूछे जाती है
के घर कब आओगे, लिखो कब आओगे
के तुम बिन ये घर सूना सूना है

किसी दिलवाली ने, किसी मतवाली ने
हमें खत लिखा है, ये हमसे पूछा है
किसी की साँसों ने, किसी की धड़कन ने
किसी की चूड़ी ने, किसी के कंगन ने
किसी के कजरे ने, किसी के गजरे ने
महकती सुबहों ने, मचलती शामों ने
अकेली रातों में, अधूरी बातों ने
तरसती बाहों ने और पूछा है तरसी निगाहों ने
के घर कब आओगे, लिखो कब आओगे
के तुम बिन ये दिल सूना सूना है
संदेसे आते हैं...

मोहब्बतवालों ने, हमारे यारों ने
हमें ये लिखा है, कि हमसे पूछा है
हमारे गाँवों ने, आम की छांवों ने
पुराने पीपल ने, बरसते बादल ने
खेत खलियानों ने, हरे मैदानों ने
बसंती बेलों ने, झूमती बेलों ने
लचकते झूलों ने, दहकते फूलों ने
चटकती कलियों ने, और पूछा है गाँव की गलियों ने
के घर कब आओगे, लिखो कब आओगे
के तुम बिन गाँव सूना सूना है
संदेसे आते हैं...

कभी एक ममता की, प्यार की गंगा की
जो चिट्ठी आती है, साथ वो लाती है
मेरे दिन बचपन के, खेल वो आंगन के
वो साया आंचल का, वो टीका काजल का
वो लोरी रातों में, वो नरमी हाथों में
वो चाहत आँखों में, वो चिंता बातों में
बिगड़ना ऊपर से, मोहब्बत अंदर से, करे वो देवी माँ
यही हर खत में पूछे मेरी माँ
के घर कब आओगे, लिखो कब आओगे
के तुम बिन आँगन सूना सूना है
संदेसे आते हैं...

ऐ गुजरने वाली हवा बता
मेरा इतना काम करेगी क्या
मेरे गाँव जा, मेरे दोस्तों को सलाम दे
मेरे गाँव में है जो वो गली
जहाँ रहती है मेरी दिलरुबा
उसे मेरे प्यार का जाम दे
उसे मेरे प्यार का जाम दे

वहीँ थोड़ी दूर है घर मेरा
मेरे घर में है मेरी बूढ़ी माँ
मेरी माँ के पैरों को छू के तू, उसे उसके बेटे का नाम दे
ऐ गुजरने वाली हवा ज़रा
मेरे दोस्तों, मेरी दिलरुबा, मेरी माँ को मेरा पयाम दे
उन्हें जा के तू ये पयाम दे

मैं वापस आऊंगा, घर अपने गाँव में
उसी की छांव में, कि माँ के आँचल से
गाँव की पीपल से, किसी के काजल से
किया जो वादा था वो निभाऊंगा
मैं एक दिन आऊंगा...

ज़िन्दगी मौत ना बन जाए - Zindagi Maut Na Ban Jaaye (Sonu Nigam, Roop Kumar Rathod, Sarfarosh)

04:26
Movie/Album: सरफ़रोश (1999)
Music By: जतिन-ललित
Lyrics By: इसरार अंसारी
Performed By: सोनू निगम, रूप कुमार राठोड़
ज़िन्दगी मौत ना बन जाए, संभालो यारों
खो रहा चैन-ओ-अमन, खो रहा चैन-ओ-अमन
मुश्किलों में है वतन, मुश्किलों में है वतन
सरफरोशी की शमा दिल में जला लो यारों
ज़िन्दगी मौत ना बन जाए, संभालो यारों

एक तरफ प्यार है, चाहत है, वफादारी है
एक तरफ देश में धोखा है, गद्दारी है
बस्तियां सहमी हुई, सहमा चमन सारा है
ग़म में क्यूं डूबा हुआ आज सब नज़ारा है
आग पानी की जगह अब्र जो बरसाएंगे
लहलाते हुए सब खेत झुलस जायेंगे, जायेंगे, जायेंगे
खो रहा चैन-ओ-अमन...

चन्द सिक्कों के लिए, तुम ना करो काम बुरा
हर बुराई का सदा होता है अंजाम बुरा

जुर्म वालों की कहाँ उम्र बड़ी है यारों
इनकी राहों में सदा मौत खड़ी है यारों
ज़ुल्म करने से सदा ज़ुल्म ही हासिल होगा
जो न सच बात कहे वो कोई बुज़दिल होगा
सरफरोशों ने लहू दे के जिसे सींचा है
ऐसे गुलशन को उजड़ने से बचा लो यारों
सरफरोशी की शमा दिल में जला लो यारों यारों यारों
ज़िन्दगी मौत ना बन जाए...

Monday, 6 June 2016

ऐ जाते हुए लम्हों - Ae Jaate Hue Lamhon (Roop Kumar Rathod, Border)

22:15


Movie/Album: बॉर्डर (1998)
Music By: अनु मलिक
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: रूप कुमार राठोड़
ऐ जाते हुए लम्हों, ज़रा ठहरो, ज़रा ठहरो
मैं भी तो चलता हूँ, ज़रा उनसे मिलता हूँ
जो इक बात दिल में हैं, उन से कहूँ
तो चलूँ, तो चलूँ...

उनके चेहरे की ये नर्मियाँ, उनके जुल्फों की ये बदलियाँ
उनकी आँखों के रोशन दीये, उनके होंठों की ये सुर्खियाँ
सब उनके हैं जलवे, मैं चलने से पहले
साँसों में, आँखों में, ख्वाबों में, यादों में
और इस दिल में उनको छुपा के रखूँ
तो चलूँ, तो चलूँ...

मैं कहीं भी रहूँ ऐ सनम, मुझको है ज़िन्दगी की कसम
फ़ासले आते जाते रहें, प्यार लेकिन नहीं होगा कम
जिन्हें चाहूँ, जिन्हें पूजूँ, उन्हें देखूँ, उन्हें छू लूँ
ज़रा बातें तो कर लूँ, ज़रा बाहों में भर लूँ
मैं इस चाँद से माथे को चूम लूँ
तो चलूँ, तो चलूँ...