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Monday, 30 May 2016

नमक इस्क का - Namak Isk Ka (Rekha Bhardwaj, Omkara)

00:00
Movie/Album: ओमकारा (2006)
Music By: विशाल भारद्वाज
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: रेखा भारद्वाज

चाँद निगल गयी
हो जी मैं चाँद निगल गयी दैय्या रे
भीतर भीतर आग जले
बात करूँ तो सेक लगे
मैं चाँद निगल..
अंग पे ऐसे छाले पड़े
तेज़ था छौंका का करूँ
सीसी करती, सीसी सीसी करती मैं मरूं
ज़बान पे लागा लागा रे
नमक इस्क का हाय, तेरे इस्क का
बलम से माँगा माँगा रे, बलम से माँगा रे
नमक इस्क का, तेरे इस्क का
ज़बान पे लागा लागा रे...

सभी छेड़े हैं मुझको, सिपहिये बांके छमिये
उधारी देने लगे हैं गली के बनिए बनिए
कोई तो कौड़ी तो भी लुटा दे, कौई तो कौड़ी
अजी थोड़ी थोड़ी शहद चटा दे, थोड़ी थोड़ी
तेज़ था तड़का का करूँ...
रात भर छाना रे
रात भर छाना, रात भर छाना छाना रे
नमक इस्क का...

ऐसी फूँक लगी जालिम की
के बाँसुरी जैसी बाजी मैं
अरे जो भी कहा उसचन्द्र भान ने
फट से हो गयी राजी मैं
कभी अखियों से पीना, कभी होंठों से पीना
कभी अच्छा लगे मरना, कभी मुस्किल लगे जीना
करवट-करवट प्यास लगी थी
अजी बलम की आहट पास लगी थी
तेज़ था छौंका...
डली भर डाला जी...डाला जी रे
डली भर डाला, डाला डाला रे
नमक इस्क का हाय...

Sunday, 29 May 2016

ओमकारा - Omkara (Sukhwinder Singh, Omkara)

02:10
Movie/Album: ओमकारा (2006)
Music By: विशाल भारद्वाज
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: सुखविंदर सिंह

धम धम धड़म धड़य्या रे
सबसे बड़े लड़य्या रे
ओमकारा, हे ओमकारा
आँखें तेज़ तकैय्या, दो-दो जीभ साँप का फुंकारा
ओमकारा, हे ओमकारा
अरे बिजुरी सा कौंधे सर पे जिसकी तलवार का झंकारा
ओमकारा, हे ओमकारा

माथे पर तिरसूल के जैसे, तीन-तीन बल पड़ते हैं
अरे कान पे जूं रेंगे तो भईया, रान बजा चल पड़ते हैं
गली गली में, अरे गली गली में
गली गली में भय बैठा है, चौक पे गूँजा हुँकारा
ओमकारा...

छत पर आ कर गिद्ध बैठें और परनालों से खून बहे
अरे कौन गिरा है, कौन कटा है, किसमा दम है, कौन कहे
छक्के छूट गए दुसमन के, ओमकारा
छक्के छूट गए दुसमन के, धरती माँगे छुटकारा
ओमकारा, हे ओमकारा...

बीड़ी जलाई ले - Beedi Jalai Le (Sukhwinder Singh, Sunidhi Chauhan, Omkara)

02:08
Movie/Album: ओमकारा (2006)
Music By: विशाल भारद्वाज
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: सुखविंदर सिंह, सुनिधि चौहान

ना गिलाफ़, ना लिहाफ़
ठंडी हवा भी खिलाफ, ससुरी
इत्ती सर्दी है किसी का लिहाफ लई ले
जा पड़ोसी के चूल्हे से आग लई ले

बीड़ी जलाई ले, जिगर से पिया
जिगर मा बड़ी आग है
धुंआ ना निकारी ओ लब से पिया
जे दुनिया बड़ी धांक है

ना कसूर,ना फतूर
बिना जुरम के हुजूर
मर गयी, हो मर गयी
ऐसे इक दिन दुपहरी बुलाई लियो रे
बाँध घुँघरू कचेहरी लगाई लियो रे
बुलाई लियो रे, बुलाई लियो रे, दुपहरी
लगाई लियो रे, लगाई लियो रे, कचेहरी
अंगेठी जलाई ले, जिगर से पिया
जिगर मा बड़ी आग है
बीड़ी जलाई ले...

ना तो चक्कुओं की धार
ना डराती, ना कटार
ऐसा काटे के दांत का निसान छोड़ दे
ये कटाई तो कोई भी किसान छोड़ दे
ओ ऐसे जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे
रे बिल्लो, जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे
ऐसे जालिम का, ओ ऐसे जालिम का
ऐसे जालिम का छोड़ दे मकान छोड़ दे
ना बुलाया, ना बताया
म्हाने नींद से जगाया, हाय रे
ऐसा चौकैल हाथ में नसीब आ गया
वो इलाईची खिलाई के करीब आ गया

कोयला जलाई ले, जिगर से पिया
जिगर मा आग है
इतनी सर्दी है...

ओ साथी रे - O Saathi Re (Shreya Ghoshal, Vishal Bhardwaj, Omkara)

02:06
Movie/Album: ओमकारा (2006)
Music By: विशाल भारद्वाज
Lyrics By: गुलज़ार
Performed By: विशाल भारद्वाज, श्रेया घोषाल

ओ साथी रे दिन डूबे ना
आ चल दिन को रोकें
धूप के पीछें दौड़ें, छाँव छुए ना
ओ साथी रे...

थका-थका सूरज जब नदी से होकर निकलेगा
हरी-हरी काई पे, पाँव पड़ा तो फिसलेगा
तुम रोक के रखना, मैं जाल गिराऊँ
तुम पीठ पे लेना, मैं हाथ लगाऊँ
दिन डूबे ना हाँ
तेरी मेरी अट्टी-बट्टी
दांत से काटी कट्टी
रे जईयो ना
ओ पीहू रे
ओ पीहू रे, ना जईयो ना

कभी-कभी यूँ करना, मैं डांटूं और तुम डरना
उबल पड़े आँखों से मीठे पानी का झरना
तेरे दोहरे बदन में, सिल जाऊँगी रे
जब करवट लेगा, छिल जाऊँगी रे
संग ले जाऊँगा
तेरी मेरी अंगनी-मंगनी, अंग संग लागी संगनी
संग ले जाऊँ, ओ पीहू रे
ओ साथी रे...