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Monday, 13 June 2016

ये जो चिलमन है - Ye Jo Chilman Hai (Md.Rafi, Mehboob Ki Mehndi)

00:33
Movie/Album: महबूब की मेहँदी (1971)
Music By: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: मो.रफ़ी

ये जो चिलमन है, दुश्मन हैं हमारी 
कितनी शर्मीली दुल्हन है हमारी

दूसरा और कोई यहाँ क्यों रहे
हुस्न और इश्क के दरमियाँ क्यों रहे
ये यहाँ क्यों रहे, हाँ जी हाँ क्यों रहे
ये जो आँचल है, शिकवा है हमारा
क्यों छुपाता है, चेहरा ये तुम्हारा
ये जो चिलमन है...

कैसे दीदार आशिक तुम्हारा करे
रूख-ए-रोशन का कैसे नज़ारा करे
ओ इशारा करे, हाँ पुकारा करे
ये जो गेसू है, बादल हैं कसम से
कैसे बिखरे हैं गालों पे सनम के
ये जो चिलमन है...

रुख़ से परदा ज़रा जो सरकने लगा
उफ़ ये कमबख्त दिल क्यों धड़कने लगा
भड़कने लगा, दम अटकने लगा
ये जो धड़कन है, दुश्मन है हमारी
कैसे दिल संभले, उलझन है हमारी
ये जो चिलमन है...

जाने क्यों लोग मोहब्बत - Jaane Kyon Log Mohabbat (Lata Mangeshkar, Mehboob Ki Mehndi)

00:14
Movie/Album: महबूब की मेहँदी (1971)
Music By: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: लता मंगेशकर

इस ज़माने में, इस मोहब्बत ने
कितने दिल तोड़े, कितने घर फूँके
जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते है
दिल के बदले दर्द-ए-दिल लिया करते है

तनहाई मिलती है, महफ़िल नहीं मिलती
राह-ए-मोहब्बत में कभी मंज़िल नही मिलती
दिल टूट जाता है, नाकाम होता है
उल्फ़त में लोगों का यही अंजाम होता है
कोई क्या जाने, क्यों ये परवाने
यूं मचलते है, ग़म में जलते है
आहें भर-भर के दीवाने जिया करते हैं
जाने क्यों लोग मोहब्बत...

सावन मे आँखो को, कितना रूलाती है
फ़ुर्क़त में जब दिल को किसी की याद आती है
ये ज़िन्दगी यूं ही बर्बाद होती है
हर वक़्त होठों पे कोई फ़रियाद होती है
ना दवाओं का नाम चलता है
ना दुआओं से काम चलता है
ज़हर ये फिर भी सभी क्यों पिया करते हैं
जाने क्यों लोग मोहब्बत...

महबूब से हर ग़म मनसूब होता है
दिन रात उल्फ़त में तमाशा खूब होता है
रातों से भी लंबे ये प्यार के किस्से
आशिक़ सुनाते हैं जफ़ा-ए-यार के किस्से
बेमुरव्वत है, बेवफा है वो
उस सितमगर का, अपने दिलबर का
नाम ले लेके दुहाई दिया करते हैं
जाने क्यों लोग मोहब्बत...

Sunday, 12 June 2016

इतना तो याद है मुझे - Itna To Yaad Hai Mujhe (Md.Rafi, Lata Mangeshkar, Mehboob Ki Mehndi)

22:37
Movie/Album: महबूब की मेहँदी (1971)
Music By: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: मो.रफ़ी, लता मंगेशकर

इतना तो याद है मुझे, के उनसे मुलाक़ात हुई
बाद में जाने क्या हुआ, न जाने क्या बात हुई

वादे वफ़ा के करके, कसमें उठा के
किसी पे दिल लूटा के, चला आया
नज़रे मिला के, नींद अपनी गवां के
कसक दिल में बसा के, चला आया
दिन तो गुजर जाएगा, क्या होगा जब रात हुई
इतना तो याद है मुझे..

मारे हया के, मैं तो आँखे झूका के
ज़रा दामन बचा के चली आयी
परदा हटा के, उनकी बातों में आके
उन्हें सूरत दिखा के चली आई
किस से शिकायत करूँ, शरारत मेरे साथ हुई
इतना तो याद है मुझे..

थी एक कहानी, पहले ये जिंदगानी
उन्हें देखा तो जीना मुझे आया
दिलबर ओ जानी, शर्म से पानी पानी
हुई मैं बस, पसीना मुझे आया
ऐसे मैं भीग गयी, जैसे के बरसात हुई
इतना तो याद है मुझे..