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Monday, 20 June 2016
`हरजाईयाँ - Harjaiyaan (Nandini Srikar, Queen)
01:30
Movie/Album: क्वीन (2014)
Music By: अमित त्रिवेदी
Lyrics By: अन्विता दत्त गुप्तन
Performed By: नंदिनी श्रीकर
साये साये फिरते हैं जिधर मुडूं
बैठी है रुसवाईयां भी रुसके दूर
बहला, फुसला के खुद को नसीहतें करूं
झूठी मूठी सी टूटी फूटी सी
हो धुंधली-धुंधली सी मैं तो इधर-उधर फिरूँ
रूठी रूठी सी
हरजाईयां मिला वो होने को जुदा क्यूं
परछाईयाँ देके ही मुझे वो गया क्यूं
कांधे ये भारी से दिन को ढो नहीं पाते
चुनती रहूं मैं ये लम्हें गिर क्यूं हैं जाते
क्यूं बुनती मैं रहूँ
किस्मत के धागे
जो खुद ही मैं छीलूँ
उधड़े उधड़े रहम से मैं मिन्नतें करूं
झूठी-मूठी सी टूटी फूटी सी
हो किसको अब ये पड़ी है मैं उखड़ी उखड़ी हूँ
रूठी रूठी सी
हर्जाइयां मिला वो...
Music By: अमित त्रिवेदी
Lyrics By: अन्विता दत्त गुप्तन
Performed By: नंदिनी श्रीकर
साये साये फिरते हैं जिधर मुडूं
बैठी है रुसवाईयां भी रुसके दूर
बहला, फुसला के खुद को नसीहतें करूं
झूठी मूठी सी टूटी फूटी सी
हो धुंधली-धुंधली सी मैं तो इधर-उधर फिरूँ
रूठी रूठी सी
हरजाईयां मिला वो होने को जुदा क्यूं
परछाईयाँ देके ही मुझे वो गया क्यूं
कांधे ये भारी से दिन को ढो नहीं पाते
चुनती रहूं मैं ये लम्हें गिर क्यूं हैं जाते
क्यूं बुनती मैं रहूँ
किस्मत के धागे
जो खुद ही मैं छीलूँ
उधड़े उधड़े रहम से मैं मिन्नतें करूं
झूठी-मूठी सी टूटी फूटी सी
हो किसको अब ये पड़ी है मैं उखड़ी उखड़ी हूँ
रूठी रूठी सी
हर्जाइयां मिला वो...
किनारे - Kinaare (Mohan Kannan, Queen)
00:35
Movie/Album: क्वीन (2014)
Music By: अमित त्रिवेदी
Lyrics By: अन्विता दत्त गुप्तन
Performed By: मोहन कन्नन
ढूंढे हर इक सांस में, डुबकियों के बाद में
हर भंवर के पास
किनारे
बह रहे जो साथ में, जो हमारे खास थे
कर गये अपनी बात
किनारे
गर माझी सारे साथ में
गैर हो भी जायें
तो खुद ही तो पतवार बन
पार होंगे हम
जो छोटी सी हर इक नहर
सागर बन भी जाये
कोई तिनका लेके हाथ में
ढूंढ लेंगे हम किनारे
किनारे, किनारे...
खुद ही तो हैं हम, किनारे
कैसे होंगे कम, किनारे
हैं जहाँ हैं हम, किनारे
खुद ही तो हैं हम
हाँ, खुद ही तो हैं हम
औरों से क्या, खुद ही से पूछ लेंगे राहें
यहीं कहीं, मौज़ों में ही, ढूंढ लेंगे हम
बूँदों से ही तो है वहीं, बांध लेंगे लहरें
पैरों तले जो भी मिले, बाँध लेंगे हम
किनारे, किनारे, किनारे...
Music By: अमित त्रिवेदी
Lyrics By: अन्विता दत्त गुप्तन
Performed By: मोहन कन्नन
ढूंढे हर इक सांस में, डुबकियों के बाद में
हर भंवर के पास
किनारे
बह रहे जो साथ में, जो हमारे खास थे
कर गये अपनी बात
किनारे
गर माझी सारे साथ में
गैर हो भी जायें
तो खुद ही तो पतवार बन
पार होंगे हम
जो छोटी सी हर इक नहर
सागर बन भी जाये
कोई तिनका लेके हाथ में
ढूंढ लेंगे हम किनारे
किनारे, किनारे...
खुद ही तो हैं हम, किनारे
कैसे होंगे कम, किनारे
हैं जहाँ हैं हम, किनारे
खुद ही तो हैं हम
हाँ, खुद ही तो हैं हम
औरों से क्या, खुद ही से पूछ लेंगे राहें
यहीं कहीं, मौज़ों में ही, ढूंढ लेंगे हम
बूँदों से ही तो है वहीं, बांध लेंगे लहरें
पैरों तले जो भी मिले, बाँध लेंगे हम
किनारे, किनारे, किनारे...
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