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Sunday, 12 June 2016
तू मइके मत जइयो - Tu Maike Mat Jaiyo (Amitabh Bachchan, Pukaar)
23:12
Movie/Album: पुकार (1983)
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: गुलशन बावरा
Performed By: अमिताभ बच्चन
तू मइके मत जइयो, मत जइयो मेरी जान
मत जइयो मेरी जान, तू मइके मत जइयो
जनवरी, फ़रवरी
जनवरी फ़रवरी के दो महीने लगती है मुझको सर्दी
तू क्या जाने, तू क्या जाने
तू क्या जाने सर्दी ने जो हालत पतली कर दी
तू मइके मत जइयो...
मार्च, अप्रैल में बहार कुछ ऐसे झूम के आये (कैसे?)
देख के तेरा, देख के तेरा
देख के तेरा गदरा बदन हाय जी मेरा ललचाये
तू मइके मत जइयो...
मई और जून का आता है जब रंगों भरा महीना
देख तेरा मलमल का कुरता, अरे छूटे मेरा पसीना
तू मइके मत जइयो...
जुलाई, अगस्त में सावन ऐसे रिमझिम रिमझिम बरसे
बन्द कमरे में, बन्द कमरे में!
बन्द कमरे में बैठेंगे हम निकलेंगे न घर से
तू मइके मत जइयो...
सेप्तम्बर, अक्तूबर का मौसम होता है प्यारा
सुनो मेरे लम्बू रे, सुनो मेरे मितवा
सुनो मेरा साथी रे
ऐसे में मैं, ऐसे में मैं
ऐसे में मैं रहूँ अकेला ये नहीं मुझे गंवारा
तू मइके मत जइयो...
हाय नवम्बर और दिसम्बर का तू पूछ न हाल
सच तो ये है, सच तो ये है
सच तो ये है पगली हम न बिछड़ें पूरा साल
तू मइके मत जइयो...
Music By: आर.डी.बर्मन
Lyrics By: गुलशन बावरा
Performed By: अमिताभ बच्चन
तू मइके मत जइयो, मत जइयो मेरी जान
मत जइयो मेरी जान, तू मइके मत जइयो
जनवरी, फ़रवरी
जनवरी फ़रवरी के दो महीने लगती है मुझको सर्दी
तू क्या जाने, तू क्या जाने
तू क्या जाने सर्दी ने जो हालत पतली कर दी
तू मइके मत जइयो...
मार्च, अप्रैल में बहार कुछ ऐसे झूम के आये (कैसे?)
देख के तेरा, देख के तेरा
देख के तेरा गदरा बदन हाय जी मेरा ललचाये
तू मइके मत जइयो...
मई और जून का आता है जब रंगों भरा महीना
देख तेरा मलमल का कुरता, अरे छूटे मेरा पसीना
तू मइके मत जइयो...
जुलाई, अगस्त में सावन ऐसे रिमझिम रिमझिम बरसे
बन्द कमरे में, बन्द कमरे में!
बन्द कमरे में बैठेंगे हम निकलेंगे न घर से
तू मइके मत जइयो...
सेप्तम्बर, अक्तूबर का मौसम होता है प्यारा
सुनो मेरे लम्बू रे, सुनो मेरे मितवा
सुनो मेरा साथी रे
ऐसे में मैं, ऐसे में मैं
ऐसे में मैं रहूँ अकेला ये नहीं मुझे गंवारा
तू मइके मत जइयो...
हाय नवम्बर और दिसम्बर का तू पूछ न हाल
सच तो ये है, सच तो ये है
सच तो ये है पगली हम न बिछड़ें पूरा साल
तू मइके मत जइयो...
Friday, 3 June 2016
ये कहाँ आ गए हम - Ye Kahan Aa Gaye Hum (Amitabh Bachchan, Lata Mangeshkar, Silsila)
04:10
Movie/Album: सिलसिला (1981)
Music By: शिव-हरि
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर
मैं और मेरी तनहाई, अक्सर ये बातें करते हैं
तुम होती तो कैसा होता
तुम ये कहती, तुम वो कहती
तुम इस बात पे हैरां होती
तुम उस बात पे कितना हँसती
तुम होती तो ऐसा होता, तुम होती तो वैसा होता
मैं और मेरी तनहाई, अक्सर ये बातें करते हैं
ये कहाँ आ गए हम, यूँ ही साथ साथ चलते
तेरी बाहों में ऐ जानम, मेरे जिस्म-ओ-जां पिघलते
ये रात है या, तुम्हारी ज़ुल्फें खुली हुई है
है चांदनी या तुम्हारी नज़रों से मेरी रातें धुली हुई है
ये चाँद है या तुम्हारा कंगन
सितारें है या तुम्हारा आँचल
हवा का झौंका है, या तुम्हारे बदन की खुशबू
ये पत्तियों की है सरसराहट
के तुमने चुपके से कुछ कहा है
ये सोचता हूँ, मैं कब से गुमसुम
के जब के, मुझको को भी ये खबर है
के तुम नहीं हो, कही नहीं हो
मगर ये दिल है के कह रहा है
तुम यहीं हो, यहीं कहीं हो
तू बदन है, मैं हूँ छाया, तू ना हो तो मैं कहाँ हूँ
मुझे प्यार करनेवाले, तू जहाँ है मैं वहाँ हूँ
हमें मिलना ही था हमदम, किसी राह भी निकलते
मेरी सांस सांस महके, कोई भीना भीना चन्दन
तेरा प्यार चांदनी है, मेरा दिल है जैसे आँगन
हुई और भी मुलायम, मेरी शाम ढलते ढलते
मजबूर ये हालात, इधर भी है, उधर भी
तनहाई की एक रात, इधर भी है, उधर भी
कहने को बहुत कुछ है, मगर किससे कहें हम
कब तक यूँ ही खामोश रहे हम और सहे हम
दिल कहता है दुनिया की हर इक रस्म उठा दें
दीवार जो हम दोनों में है, आज गिरा दें
क्यों दिल में सुलगते रहे, लोगों को बता दें
हाँ हमको मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत
अब दिल में यही बात, इधर भी है, उधर भी
Music By: शिव-हरि
Lyrics By: जावेद अख्तर
Performed By: अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर
मैं और मेरी तनहाई, अक्सर ये बातें करते हैं
तुम होती तो कैसा होता
तुम ये कहती, तुम वो कहती
तुम इस बात पे हैरां होती
तुम उस बात पे कितना हँसती
तुम होती तो ऐसा होता, तुम होती तो वैसा होता
मैं और मेरी तनहाई, अक्सर ये बातें करते हैं
ये कहाँ आ गए हम, यूँ ही साथ साथ चलते
तेरी बाहों में ऐ जानम, मेरे जिस्म-ओ-जां पिघलते
ये रात है या, तुम्हारी ज़ुल्फें खुली हुई है
है चांदनी या तुम्हारी नज़रों से मेरी रातें धुली हुई है
ये चाँद है या तुम्हारा कंगन
सितारें है या तुम्हारा आँचल
हवा का झौंका है, या तुम्हारे बदन की खुशबू
ये पत्तियों की है सरसराहट
के तुमने चुपके से कुछ कहा है
ये सोचता हूँ, मैं कब से गुमसुम
के जब के, मुझको को भी ये खबर है
के तुम नहीं हो, कही नहीं हो
मगर ये दिल है के कह रहा है
तुम यहीं हो, यहीं कहीं हो
तू बदन है, मैं हूँ छाया, तू ना हो तो मैं कहाँ हूँ
मुझे प्यार करनेवाले, तू जहाँ है मैं वहाँ हूँ
हमें मिलना ही था हमदम, किसी राह भी निकलते
मेरी सांस सांस महके, कोई भीना भीना चन्दन
तेरा प्यार चांदनी है, मेरा दिल है जैसे आँगन
हुई और भी मुलायम, मेरी शाम ढलते ढलते
मजबूर ये हालात, इधर भी है, उधर भी
तनहाई की एक रात, इधर भी है, उधर भी
कहने को बहुत कुछ है, मगर किससे कहें हम
कब तक यूँ ही खामोश रहे हम और सहे हम
दिल कहता है दुनिया की हर इक रस्म उठा दें
दीवार जो हम दोनों में है, आज गिरा दें
क्यों दिल में सुलगते रहे, लोगों को बता दें
हाँ हमको मोहब्बत है, मोहब्बत है, मोहब्बत
अब दिल में यही बात, इधर भी है, उधर भी
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