Movie/Album: क़यामत (2003)
Music By: नदीम-श्रवण
Lyrics By: समीर
Performed By: अलका याग्निक, कुमार सानू
कभी मुझको हँसाए, कभी मुझको रुलाए
मुझे कितना सताती है
वो लड़की बहुत याद आती है
मेरे सपनों में आए, मेरे दिल को चुराए
मुझे कितना सताता है
वो लड़का बहुत याद आता है
देखा उसे जब पहली बार, बन गया दीवाना मैं यार
करके अनजाना इकरार, ले गई दिल का चैन क़रार
थोड़ी सी घबराई थी, थोड़ी सी शरमाई थी
कितना प्यारा मुखड़ा है, वो तो चाँद का टुकड़ा है
जाने कहाँ छुप जाती है
वो लड़की बहुत याद आती है...
मैं तो उसपे मरती हूँ, दुनिया से नहीं डरती हूँ
नाम से उसके सँवरती हूँ, पल-पल आहें भरती हूँ
माना के मजबूरी है, चाहत अभी अधूरी है
बस कुछ दिन की दूरी है, मिलना बहुत ज़रूरी है
क्या-क्या दर्द जगाता है
वो लड़का बहुत याद आता है...
Sad
चारों तरफ तन्हाई है, एक उदासी छाई है
सोच के उसकी बातों को, आँख मेरी भर आई है
बेचैनी है साँसों में, दर्द उठा है सीने में
बिछड़ के अपने दिलबर से, आए मज़ा न जीने में
कितना मुझे तड़पाती है
वो लड़की बहुत याद आती है
2003
,
Alka Yagnik
,
K
,
Kumar Sanu
,
Nadeem Shravan
,
Qayamat
,
Sameer
Music By: नदीम-श्रवण
Lyrics By: समीर
Performed By: अलका याग्निक, कुमार सानू
कभी मुझको हँसाए, कभी मुझको रुलाए
मुझे कितना सताती है
वो लड़की बहुत याद आती है
मेरे सपनों में आए, मेरे दिल को चुराए
मुझे कितना सताता है
वो लड़का बहुत याद आता है
देखा उसे जब पहली बार, बन गया दीवाना मैं यार
करके अनजाना इकरार, ले गई दिल का चैन क़रार
थोड़ी सी घबराई थी, थोड़ी सी शरमाई थी
कितना प्यारा मुखड़ा है, वो तो चाँद का टुकड़ा है
जाने कहाँ छुप जाती है
वो लड़की बहुत याद आती है...
मैं तो उसपे मरती हूँ, दुनिया से नहीं डरती हूँ
नाम से उसके सँवरती हूँ, पल-पल आहें भरती हूँ
माना के मजबूरी है, चाहत अभी अधूरी है
बस कुछ दिन की दूरी है, मिलना बहुत ज़रूरी है
क्या-क्या दर्द जगाता है
वो लड़का बहुत याद आता है...
Sad
चारों तरफ तन्हाई है, एक उदासी छाई है
सोच के उसकी बातों को, आँख मेरी भर आई है
बेचैनी है साँसों में, दर्द उठा है सीने में
बिछड़ के अपने दिलबर से, आए मज़ा न जीने में
कितना मुझे तड़पाती है
वो लड़की बहुत याद आती है
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