Movie/Album: हमारी अधूरी कहानी (2015)
Music By: मिथुन
Lyrics By: सईद कादरी
Performed By: पैपॉन
ऐ हमनवा मुझे अपना बना ले
सुखी पड़ी दिल की इस ज़मीं को भीगा दे
हूँ अकेला ज़रा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीं को भीगा दे
कबसे मैं दर-दर फिर रहा
मुसाफिर दिल को पनाह दे
तु आवारगी को मेरी आज ठहरा दे
हो सके तो थोड़ा प्यार जता दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीं को भीगा दे
मुरझाई सी शाख पे दिल की फूल खिलते हैं क्यों
बात गुलों की, ज़िक्र महक का, अच्छा लगता है क्यों
उन रंगों से तूने मिलाया
जिनसे कभी मैं मिल ना पाया
दिल करता है तेरा शुक्रिया
इसी बहाने तु ला दे
दिल का सूना बंजर महका दे
सूखी पड़ी...
वैसे तो मौसम गुज़रे हैं ज़िन्दगी में कई
पर अब ना जाने क्यों मुझे वो लग रहे हैं हसीं
तेरे आने पर जाना मैंने
कहीं ना कहीं ज़िन्दा हूँ मैं
जीने लगा हूँ मैं अब ये फ़िज़ाएं
चेहरे को छूती हवाएँ
इनकी तरह दो क़दम तो बढ़ा ले
सूखी पड़ी...
2015
,
A
,
H
,
Hamari Adhuri Kahani
,
Mithoon
,
Papon
,
Saeed Kadri
,
Sayeed Qaadri
Music By: मिथुन
Lyrics By: सईद कादरी
Performed By: पैपॉन
ऐ हमनवा मुझे अपना बना ले
सुखी पड़ी दिल की इस ज़मीं को भीगा दे
हूँ अकेला ज़रा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीं को भीगा दे
कबसे मैं दर-दर फिर रहा
मुसाफिर दिल को पनाह दे
तु आवारगी को मेरी आज ठहरा दे
हो सके तो थोड़ा प्यार जता दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीं को भीगा दे
मुरझाई सी शाख पे दिल की फूल खिलते हैं क्यों
बात गुलों की, ज़िक्र महक का, अच्छा लगता है क्यों
उन रंगों से तूने मिलाया
जिनसे कभी मैं मिल ना पाया
दिल करता है तेरा शुक्रिया
इसी बहाने तु ला दे
दिल का सूना बंजर महका दे
सूखी पड़ी...
वैसे तो मौसम गुज़रे हैं ज़िन्दगी में कई
पर अब ना जाने क्यों मुझे वो लग रहे हैं हसीं
तेरे आने पर जाना मैंने
कहीं ना कहीं ज़िन्दा हूँ मैं
जीने लगा हूँ मैं अब ये फ़िज़ाएं
चेहरे को छूती हवाएँ
इनकी तरह दो क़दम तो बढ़ा ले
सूखी पड़ी...
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